World Ozone Day: जानिए किस तरह प्रदूषण व कीटनाश का उपयोग कम कर बचा सकते हैं ओजोन परत

औद्योगिक प्रदूषण घटाकर व कीटनाशक का उपयोग कम कर ओजोन परत को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं।

dainik jagran

September 17, 2020

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zeenews

भोपाल, जेएनएन। धरती की सतह से 15 से 30 किलोमीटर ऊंचाई पर ओजोन गैस की परत है, जो मनुष्यों और मवेशियों को हानिकारक अल्ट्रावायलट (यूवी) किरणों से बचाती है। इन किरणों से मनुष्यों में कैंसर हो सकता है तो मवेशियों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये किरणें सीधे धरती पर आ जाएं तो इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। ओजोन परत इन किरणों को ऊपर ही रोक लेती है, इसलिए ओजोन को सुरक्षा कवच भी कहते हैं। 16 सितंबर को विश्व में ओजोन परत संक्षरण दिवस मनाया जाता है। हम भी औद्योगिक प्रदूषण घटाकर व कीटनाशक का उपयोग कम कर ओजोन परत को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व की तुलना में उत्तरी धु्रव पर ओजोन को हुए नुकसान की भरपाई हो रही है।

ऐसे कर सकते हैं संरक्षण में मदद

-वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 तक पहुंच जाता है। इसमें बड़ा हिस्सा उद्योगों से निकलने वाले धुएं का रहता है। यह सूचकांक 50 से ऊपर नहीं होना चाहिए। ऐसा तभी होगा, जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय मानकों से अधिक प्रदूषण न फैले।

-एक लघु किसान न्यूनतम पांच लीटर व मध्यम किसान न्यूनतम 10 लीटर कीटनाशक का उपयोग कर रहा है। इस तरह हजारों लीटर कीटनाशक एक सीजन में उपयोग हो रहा है। इसकी खपत घटानी होगी।

-मध्यमवर्गीय परिवारों में भी एसी का उपयोग होता है। संपन्न लोग घर, वाहन आदि में दो से पांच एसी तक का उपयोग करते हैं। इनमें उपयोग होने वाली गैसें भी ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं। हालांकि, पूर्व की तुलनामें ऐसी गैस का उत्पादन बंद कर दिया है।

-प्रत्येक परिवार अधिकतम 15 इलेक्ट्रॉनिक सामान उपयोग करते हैं। इनके बनाने के दौरान हानिकारक गैस व अवशेष निकलते हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं। जब इनके निष्पादन की बात आती है तो यह काम ठीक से नहीं किया जाता। यह काम और अधिक वैज्ञानिक ढंग से करने की जरूरत है।

-मध्य प्रदेश में 1500 से अधिक मोबाइल समेत अन्य प्रकार के टॉवर हैं। इनमें कई तरह की तरंगों का इस्तेमाल होता है। विभिन्न अध्ययन से पता चलता है कि ये ओजोन को नुकसान पहुंचाती हैं। इनकी निगरानी कड़ाई से करने की जरूरत है।

2019 के अंत तक उत्तरी ध्रुव में ओजोन का क्षरण रुका

मध्य प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सेवानिवृत्त मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी गुणवंत जोशी ने बताया कि यह वैश्विक समस्या है, जिस पर विभिन्न देशों के बीच हुए समझौते के बाद प्रभावी ढंग से काम हुआ है। 2019 के अंत तक उत्तरी ध्रुव में ओजोन का क्षरण रुका है। 2030 तक दक्षिणी ध्रुव में भी क्षरण रोकने का लक्ष्य है, जो समय से पहले हासिल हो सकता है।

पर्यावरणविद् डॉ सुभाण सी पांडे ने कहा कि औद्योगिक प्रदूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फ्रीयॉन गैस ओजोन को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन कारकों को और अधिक नियंत्रित करने की जरूरत है। ओजोन को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर पूर्व में किए गए प्रयासों के अच्छे नतीजे आ रहे हैं।

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एए मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण और ओजोन परत के संरक्षण के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। आगे भी करेंगे। आम आदमी की जागरूकता व सहभागिता भी जरूरी है।

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