होम्योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति शिक्षा में आएगा सुधार, आम लोगों तक पहुंचेगा इसका लाभ

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि प्रस्तावित कानूनों से देश में होम्योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति के बेहतर प्रशासन में मदद मिलेगी।

dhyanendra singh

September 16, 2020

National

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zeenews

नई दिल्ली, प्रेट्र। संसद ने चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इन विधेयकों का मकसद गुणवत्तापूर्ण और सस्ती चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच में सुधार करना है, ताकि देशभर में होम्योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति के अच्छे और पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग विधेयक पारित हुआ। राज्यसभा में पहले ही ये दोनों विधेयक पास हो चुके हैं। अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की औपचारिक मंजूरी के बाद ये दोनों विधेयक कानून का रूप ले लेंगे।

संसद के निचले सदन में विपक्ष के कुछ सदस्यों ने विधेयकों का यह कहते हुए विरोध किया कि सरकार को इस पर व्यापक चर्चा करानी चाहिए थी।

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि प्रस्तावित कानूनों से देश में होम्योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति के बेहतर प्रशासन में मदद मिलेगी। प्रस्तावित कानून से न्यायसंगत और सार्वभौमिक चिकित्सा सेवा को बढ़ावा मिलेगा। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा को बल मिलेगा और इस क्षेत्र के बेहतरीन चिकित्सकों तक आम लोगों की पहुंच हो सकेगी।

कोरोना को सीमित करने में मिली कामयाबी

कोरोना वायरस पर लोकसभा में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि अधिकतम मामले और मौतें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल और गुजरात से हुई हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रयासों की वजह से देश में कोरोना को सीमित करने में कमयाबी मिली। प्रति 10 लाख जनसंख्या पर भारत में 3,328 मामलें हैं और 55 मौतें हैं, जो दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कम है।

लॉकडाउन के फैसले को सही ठहराया

हर्षवर्धन ने बताया कि पिछले चार महीने में सरकार पूरे देश में कोरोना के खिलाफ लंबी लड़ाई की पुख्ता तैयारी करने में सफल रही है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जनता कर्फ्यू’ के आह्वान और कड़ाई से लॉकडाउन लागू करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इन कठोर कदमों की वजह से शुरुआती दौर में संक्रमण के फैलने की गति को रोकने में अहम सफलता मिली। इस कारण 14 से 29 लाख तक लोगों को संक्रमण से बचाने में सफलता मिली।

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