DDCA ने 2 साल में मुकदमेबाजी में खर्च कर दिए 9 करोड़ रुपये, अधिकारी का खुलासा

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ यानी डीडीसीए में मुकदमेबाजी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसमें 9 करोड़ संघ ने खर्च कर दिए हैं।

vikash gaur

September 16, 2020

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नई दिल्ली, आइएएनएस। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने बीते दो साल में मुकदमेबाजी पर तकरीबन नौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। इस बात पर रविवार को हुई शीर्ष परिषद की बैठक में चर्चा हुई और फैसला किया गया कि वकील अंकुल चावला व गौतम दत्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए, ताकि खर्चों की जांच की जा सके। जो पैसा खिलाड़ियों के विकास में लगना था उस पैसे का इस्तेमाल बोर्ड से जुड़े मसलों को लेकर किया है।

डीडीसीए की शीर्ष परिषद ने मुकदमेबाजी पर खर्च को नियंत्रित करने के लिए तो कदम उठाए हैं, लेकिन उसने डीडीसीए के इंटरनल ऑडिटर्स द्वारा जारी फोरेंसिक ऑडिट को भी रोक दिया है। इस कदम पर परिषद के कुछ सदस्यों ने सवाल उठाए और नए फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति के लिए पारदर्शी तरीके से बोली लगाने का फैसला किया। फोरेंसिक ऑडिट को चालू हुए एक सप्ताह हो गया था। परिषद ने दत्ता द्वारा हस्ताक्षर किए गए सभी वकालतनामों को वापस लेने का फैसला किया है।

एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी आइएएनएस से बात करते हुए कहा कि परिषद के 18 सदस्यों में 11 जिनमें से तीन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए गए थे वे रविवार की बैठक में जुलाई-2018 से अब तक खर्च की गई रकम जानकर हैरान रह गए, जिसमें वकीलों और पेशेवर लोगों को भर्ती करने के लिए खर्च किया गया पैसा भी शामिल है। कानूनी खर्चों की भी जांच की गई। डीडीसीए के पूर्व महासचिव अनिल खन्ना की पत्नी रेणु खन्ना की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

सीनियर वकील मनिंदर सिंह की अध्यक्षता में नई कानूनी समिति का गठन डीडीसीए की शीर्ष परिषद में किया गया है। ये कमेटी डीडीसीए के सभी कानूनी मामलों को देखेगी। इस समिति में सुनील यादव और रजनी अब्बी भी सदस्य हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया है। बैठक के माइन्यूट के मुताबिक, “शीर्ष परिषद की मंजूरी से गौतम दत्ता (परामर्शदाता, लीगर रिटेनर) विनोद तिहारा (डीडीसीए के निलंबित सचिव) द्वारा नियुक्त किए गए सभी वकीलों को हटाया जाता है। अंकुर चावला को भी हटाया जाता है और वह किसी भी फोरम पर डीडीसीए का पक्ष रखते हुए दिखाई नहीं देंगे।”

एक और अधिकारी ने कहा है, “वकीलों को दिए गए पैसे के जो आरोप हैं वो शीर्ष परिषद के सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार को छुपाने के बहाने हैं। दिसंबर 2018 में हुई आखिरी एजीएम से हर साल तीन करोड़ रुपये पूर्व अध्यक्ष की निजी मुकदमेबाजी और सचिव के साथ चल रही राजनैतिक लड़ाई में खर्च होते थे, लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं करेगा। रोचक बात यह है कि सरकार द्वारा जो लोग नियुक्त किए गए हैं उनमें से एक सचिव के खिलाफ डीडीसीए की तरफ से केस लड़ रहा था और उनकी फर्म को बड़ी रकम दी गई। उम्मीद है कि हम लोढ़ा समिति की हितों की टकराव की सिफारिश को नहीं भूले होंगे।”

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