Agriculture Bill: अशोक गहलोत और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र सरकार को बताया किसान विरोधी

Agriculture Bill अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला व छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री टीएस सिंह देव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि संसद में अन्नदाता के नुमाइंदों का गला घोंटा जाता है।

sachin kumar mishra

September 26, 2020

Politics

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zeenews

जयपुर, जागरण संवाददाता। Agriculture Bill: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला व छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री टीएस सिंह देव ने शुक्रवार को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि संसद में अन्नदाता के नुमाइंदों का गला घोंटा जाता है। वहीं, सड़कों व खेत में किसानों और मजदूरों को बेरहमी से पीटा जा रहा है। किसान विरोधी एजेंडा मोदी सरकार ने 2006 में बिहार से शुरू किया था, जहां किसान बर्बाद हो गया। अब इन तीन काले कानून के माध्यम से देशभर में ले आए हैं। तीनों कृषि विधेयकों की आलोचना करते हुए गहलोत, सुरजेवाला व देव ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। किसान सड़कों पर हैं। देश में कारोना फैला हुआ है, सीमा पर चीन और खेतों में मोदी ने हमला बोल रखा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिना किसानों से बात किए 40 साल पुराना कानून बदल दिया। तीनों कृषि विधेयक शर्मनाक तरीके से संसद में पास कराए गए। राज्यसभा में मत विभाजन तक नहीं कराया गया। इस कारण विरोधी दलों ने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह किया है। इन विधेयकों के कारण मंडियां बर्बाद हो जाएगी।

बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं

गहलोत ने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा जो हालात बना दिए गए उनके कारण पूरा देश सड़कों पर है। जब से एनडीए सरकार आई है, तब से चाहे नोटबंदी हो जीएसटी या फिर कृषि बिल लाने की बात हो। सभी काम बिना किसी से बात हो रहे हैं। जिन कृषि मंडियों को बनने में 40 साल लग गए। उन्हें एक झटके में उखाड़ फेंकने का निर्णय कर रहे हैं। बड़े-बड़े व्यापारियों को छूट दे रहे है कि जो मर्जी हो कर सकते हो। गहलोत ने कहा कि किसान समझदार हैं। वो समझ सकता है, उसका हित किस रूप में सुरक्षित है। अब सरकार डिफेंस में आते हुए एमएसपी की बात कर रही है। हालात बड़े गंभीर हैं। जिस तरीके से तीनों बिल पास किए गए, वो शर्मनाक है। संसद में रिविजन नहीं किया गया, इसलिए हमारे नेताओं ने राष्ट्रपति से भी बात की। गहलोत ने कहा कि किसान और व्यापारी में विवाद होता है तो अभी किसान मंडी में सुलझ जाता है। अब अगर विवाद होगा तो उपखंड अधिकारी के पास जाना पड़ेगा, फिर कलेक्टर से अपील करो। समस्त प्रावधान किसान विरोधी हैं। मंडियां समाप्त हो जाएंगी। बहुत बड़ी बर्बादी के लक्षण दिख रहे हैं।

हरित क्रांति को खत्म करने की साजिश

सुरजेवाला ने कहा कि आज पूरे देश में किसान और खेत मजदूर ने भारत बंद का एलान किया है। पीएम मोदी किसानों की बात सुनना तो दूर संसद में उनके प्रतिनिधियों को बात तक नहीं रखने देते। कांग्रेस इस बंद में किसान के साथ खड़ी है। भाजपा हरित क्रांति को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं। मोदी कसम किसानों की खाते हैं, वहीं फायदा चंद व्यापारी दोस्तों को दिलवाते हैं। किसान और खेत मजदूर के भविष्य को रौंद कर मोदी ने बर्बादी और बदहाली की गाथा इन तीन काले कानून के जरिए लिख दी है। ये किसान और खेत के खिलाफ घिनौना षड्यंत्र है। देश में 62 करोड़ किसान और खेत मजदूर इन काले कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना विरोध जता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश में हरीत क्रांति के तीन आधार थे। पहला फसल खरीद प्रणाली, जिसमें 23 फसलों को सरकार खरीदने के लिए बाध्य है। दूसरा 23 फसलों का एमएसपी तय करना और तीसरा गरीब की राशन की दुकान। इसके तहत किसान से जो फसल खरीदी जाएगी, वो सस्ते दामों पर गरीब को दी जाएगी। सुरजेवाला ने कहा कि मोदी ने मुख्यमंत्री रहते हुए किसानों से जुड़ी रिपोर्ट में कहा था कि कानून के अंदर एमएसपी की शर्त लिखना अनिवार्य होना चाहिए। 

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