एनपीसीआई की मंजूरी से ही शेयर होता है डाटा: गूगल

डिजिटल पेमेंट ऐप Google Pay का संचालन करने वाली कंपनी गूगल इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि उसे NPCI और भुगतान सेवा प्रदान करने (PSP) बैंकों की पूर्व अनुमति के साथ तीसरे पक्ष के साथ ग्राहकों के लेनदेन के डेटा को साझा करने की अनुमति है

renu yadav

September 26, 2020

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नई दिल्ली, पीटीआई। गूगल इंडिया डिजिटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने हाई कोर्ट को बताया कि Google Pay पर होने वाले ट्रांजेक्शन का डाटा नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की पूर्व अनुमति के आधार पर ही थर्ड पार्टी के साथ शेयर किया जाता है। बता दें कि हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से भी इस मुद्दे पर जवाब मांगा था, लेकिन दोनों पक्षों का जवाब न आने के बाद सुनवाई को 10 नवंबर के लिए टाल दिया गया है। 

अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि गूगल को निर्देश दिया जाए कि वह किसी अन्य पक्ष को यूपीआइ डाटा साझा न करे। याचिका में आरोप लगाया गया कि कंपनी संवेदनशील व्यक्तिगत डाटा को स्टोर और तीसरे पक्ष के साथ साझा कर रही है। हालांकि, गूगल ने स्पष्ट कर दिया है कि गूगल सिर्फ कस्टमर के नाम, ईमेल जैसी साधारण जानकारी ही स्टोर करता है। ग्राहकों की संवेदनशील जानकारियां जैसे कार्ड नंबर, पिन आदि ग्राहक के बैंक के सर्वर पर ही संरक्षित होती हैं उनसे गूगल का कोई संबंध नहीं है।

Google द्वारा आरबीआई के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष दायर अपने हलफनामे में एक जनहित याचिका के जवाब में ‘Google Pay’ के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के लिए दायर किए गए शपथ पत्र में डाटा स्थानीयकरण, स्टोरेज और शेयरिंग से संबंधित RBI के दिशानिर्देशों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसके लिए RBI से भी जवाब मांगा गया था लेकिन जवाब न मिलने के बाद सुनवाई को 10 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया है।

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Google ने आगे कहा है कि GPay की तरह अन्य TPAP हैं, लेकिन इसके खिलाफ याचिका ‘”selectively filed’ दायर की गई है। शर्मा ने अपनी दलील में, Google से UPI इकोसिस्टम के तहत अपने ऐप पर डाटा स्टोर न करने का एक उपक्रम देने और इसके होल्डिंग या मूल कंपनी सहित किसी भी तीसरे पक्ष के साथ इसे साझा नहीं करने के लिए एक निर्देश देने की भी मांग की है।

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