कचरा प्रबंधन नियमों के दायरे में हैं प्लास्टिक पेन या नहीं : एनजीटी

एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मसले पर 14 अक्टूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है।

dainik jagran

September 17, 2020

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zeenews

नई दिल्ली, प्रेट्र। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को एक रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि क्या प्लास्टिक के पेन प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (पीडब्लूएम) नियम, 2018 के दायरे में आते हैं।एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मसले पर 14 अक्टूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है।

पीठ ने यह आदेश तब दिया जब सीपीसीबी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि पीडब्लूएम नियम, 2018 के दायरे में कई परतों वाले प्लास्टिक के सैशे या पाउच या पैकेजिंग शामिल हैं, लेकिन पेन और अन्य प्लास्टिक उत्पाद एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) में शामिल नहीं हैं। बोर्ड ने कहा, ‘पीडब्लूएम नियम, 2018 के तहत ईपीआर के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय विचार कर रहा है। सीपीसीबी ने मंत्रालय से ईपीआर के तहत आने वाली वस्तुओं को साफ तौर पर बताने के लिए कहा है।’

पर्यावरण मंत्रालय ने एनजीटी को बताया कि उसने पेन समेत प्लास्टिक कचरा निस्तारण के लिए उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को तीन उपाय सुझाए हैं। ट्रिब्यूनल अवनि मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया है कि प्लास्टिक पेनों के बेरोकटोक इस्तेमाल का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

6 माह के भीतर देशभर में लगाएं 175 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) ने छह महीने के भीतर देशभर में 175 वायु गुणवत्ता निगरानी (एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग) स्टेशन स्थापित करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर एनजीटी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Program, NCAP) पर रिपोर्ट को लेकर फटकार भी लगाई। इसमें 2024 तक 20 से 30 फीसद वायु प्रदूषण कम करने का प्रस्ताव किया गया है।

एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board, CPCB) को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो के चेयरमैन, सदस्य सचिवों या अन्य अधिकारियों के साथ निर्धारित समय पर ऑनलाइन बैठक के माध्यम से निगरानी करने का निर्देश दिया है। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि इस दिशा में काम एक महीने के भीतर शुरू किया जा सकता है। 

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