‘Oxygen की कमी से मौत नहीं’ वाले केंद्र के बयान पर प्रियंका गांधी ने साधा निशाना, सरकार पर की आरोपों की बौछार

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। दरअसल कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की दिक्कत के कारण लोगों के मरने की केंद्र सरकार की दलील को गलत बताते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं बल्कि सरकार […]

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July 21, 2021

National

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zeenews

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है दरअसल कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की दिक्कत के कारण लोगों के मरने की केंद्र सरकार की दलील को गलत बताते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं बल्कि सरकार की गलत नीति रही है। 

प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, ‘”ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई”: केंद्र सरकार. “मौतें इसलिए हुईं, क्योंकि महामारी वाले साल में सरकार ने ऑक्सीजन निर्यात 700 प्रतिशत तक बढ़ा दिया, क्योंकि सरकार ने ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट करने वाले टैंकरों की व्यवस्था नहीं की।” उन्होंने आगे कहा, “एंपावर्ड ग्रुप और संसदीय समिति की सलाह को नजरंदाज कर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का कोई इंतजाम नहीं किया। अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने में कोई सक्रियता नहीं दिखाई।”

सरकार ने कहा- देश में ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई
बता दें कि मंगलवार को राज्यसभा में सरकार से सवाल पूछा गया था कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से कितने मरीजों की मौत हुई? जिस पर सरकार ने जवाब दिया कि ऑक्सीजन की वजह से एक भी मौत नहीं हुई। राज्यसभा में सरकार ने बताया कि कोरोना से होने वाली मौतों की जानकारी नियमित आधार पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देते हैं। लेकिन किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौत को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय को जानकारी नहीं दी है। 
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये भी बताया कि पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड काफी बढ़ गई थी। पहली लहर में जहां 3,095 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की डिमांड थी, तो वहीं दूसरी लहर में यही डिमांड 9,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई। सरकार ने बताया कि दूसरी लहर में केंद्र की ओर से 28 मई तक राज्यों को 10,250 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई की गई। सबसे ज्यादा 1200-1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन महाराष्ट्र और कर्नाटक को दी गई। जबकि, दिल्ली को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दी गई।

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