स्‍वरोजगारियों के लिए जरूरी है Term Life Insurance, जानिए क्‍या है इसके पीछे वजह

जो लोग स्वरोजगार कर रहे है उनपर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की पूरी संभावना है। यह वित्तीय बोझ कारोबार को विस्तार करने में कार्यशील पूंजी कर्ज के रूप में या कभी-कभी पर्सनल लोन के रूप में हो सकता है।

manish mishra

September 26, 2020

Business

Expert Column

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zeenews

नई दिल्‍ली, संतोष अग्रवाल। कोरोना वायरस महामारी ने दुनियाभर के लोगों का नजरिया बदल दिया है। इस महामारी से न सिर्फ देश के हर हिस्से में रहने वाले लोग प्रभावित हुए हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कृति और समाज पर भी गहरा असर पड़ा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन के बीच सीमित आर्थिक गतिविधियों की वजह से जीडीपी पर इस तरह का प्रतिकूल असर पड़ा। पिछले चार दशक के दौरान, अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई थी।

असंगठित क्षेत्र के समक्ष चुनौतियां

असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले देश के कार्यबल का 90 फीसदी, यानी लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार से संबंधित असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में, सरकार और न्यायपालिक ने हस्तक्षेप किया है और एडवाइजरी नोटिस भी जारी किया है, लेकिन क्या ये पर्याप्त हैं? नीति से जुड़े हस्तक्षेप के बारे में क्या कहेंगे? मौजूदा कोरोना महामारी काल में छोटी-छोटी कंपनियों के मालिक और स्वरोजगार करने वाले लोग किस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, यह समझना बेहद जरूरी है। कोविड-19 महामारी के कारण पड़ने वाले आर्थिक असर पर होने वाली चर्चा में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले इन लोगों को नजरअंदाज किया जाता है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन के विभिन्न चरणों के दौरान 4.5 करोड़ से अधिक कारोबारियों से उनका रोजगार छिनने का अनुमान है।

जो लोग स्वरोजगार कर रहे है, उनपर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की पूरी संभावना है। यह वित्तीय बोझ कारोबार को विस्तार करने में कार्यशील पूंजी कर्ज के रूप में या कभी-कभी पर्सनल लोन के रूप में हो सकता है। ऐसी स्थिति में स्वरोजगार करने वाले लोगों को अपनी बचत या निवेश से समझौता करना पड़ सकता है। इसके कारण आपातकाल में पैसे की जरूरत पड़ने पर उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। यह आपातकाल इस बात के लिए हमें सोचने पर मजबूर करता है कि भविष्य के लिए प्लानिंग बेहद जरूरी है।

टर्म प्लान से अपना भविष्य सुरक्षित करें

अप्रत्याशित स्थिति मे अपने परिवार को किसी भी तरह के बकाया, लोन या अन्य वित्तीय संकट से बचाने के लिए आपके पास एक ऑल-राउंड सॉल्यूशन होना जरूरी है। किसी भी अप्रत्याशित स्थिति, जैसे एकमात्र कमाऊ व्यक्ति की अचानक मौत होने पर उसके पूरे परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने में टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान अहम भूमिका निभाता है। वेतनभोगी लोगों की तुलना में देश की कार्यशील स्वरोजगार करने वाली आबादी और उनके परिवार को सबसे ज्यादा वित्तीय जोखिम होता है और इसलिए उन्हें टर्म इंश्योरेंस की जरूरत पर जरूर विचार करना चाहिए। हालांकि, एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महज 20 फीसदी स्वरोजगार करने वाले लोग ही हर साल टर्म इंश्योरेंस लेते हैं।

स्वरोजगार करने वाले लोगों की आमदनी हमेशा एक सी नहीं होती और लंबी अवधि में बड़े मुनाफे के लिए अल्प काल में उन्हें बचत और निवेश से समझौत करना पड़ता है। स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति परिवार की जिम्मेदारी के अलावा, बिजनस की खातिर लिए गए लोन को चुकाने के लिए भी जिम्मेदार होता है। एक कारोबार के लिए विभिन्न चरणों में कई देनदारी हो सकती है। इसलिए, यह जरूरी है कि टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान के जरिए आपके परिवार के पास पर्याप्त वित्तीय समर्थन हो।

स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के समक्ष कई तरह की चुनौतियां होती हैं, हालांकि टर्म इंश्योरेंस लेने की राह में उनके सामने कुछ ही समस्याएं होती हैं। टर्म इंश्योरेंस, जैसा कि नाम से जाहिर है कि पॉलिसी अवधि में अगर पॉलिसीधारक के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है, तो इसमें बेनिफिशियरी को कवरेज मिलता है। टर्म प्लान के लिए मासिक प्रीमियम बहुत कम होती है। यह प्रीमियम पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की आयु, लिंग और चिकित्सकीय इतिहास पर निर्भर करता है। 30 साल का एक व्यक्ति महज 1,000 रुपये की मासिक प्रीमियम में 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस खरीद सकता है। टर्म इंश्योरेंस स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प है, क्योंकि यह किफायती, आसान और यहां तक कि टर्म रिटर्न ऑफ प्रीमियम प्लान के जरिए ‘निवेश’ पर रिटर्न का भी वादा करता है। इसके अलावा, यह पॉलिसीधारक को किसी भी तरह की अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करता है और उसपर निर्भर रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा भी करता है।

स्वरोजगार करने वाले लोगों के लिए टर्म इंश्योरेंस में लिमिटेड पे ऑप्शन है सबसे बेहतर

चूंकि उद्यमियों और स्वरोजगार करने वाले लोगों की आमदनी हर दिन एक समान नहीं होती है, ऐसे में उनके लिए कम अवधि तक प्रीमियम भरने वाला प्लान इनके लिए अच्छा होता है। जब आपकी आमदनी बढ़ती है, तो आप सभी प्रीमियम का भुगतान करके बुढ़ापे तक कवरेज का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा, एक स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति के रूप में आप अपने रिटायरमेंट के बाद भी कमाई बरकरार रखते हैं। इस तरह, आपके मामले में इनकम रिप्लेसमेंट के रूप में रिटायरमेंट के बाद भी लंबे समय तक रिस्क कवरेज आपके लिए उचित होता है। अगर अभी आपकी आयु 35 साल है और आप 35 साल की अवधि की कोई पॉलिस लेते हैं, जिसकी प्रीमियम भुगतान अवधि 10 साल होती है, तो आप 45 की आयु तक पहुंचने पर अपने प्रीमियम का भुगतान कर चुके होते हैं। वहीं, आप 70 साल तक कवरेज का फायदा उठाते हैं।

लिमिटेड पे प्लान में प्रीमियम का भुगतान कुछ ही वर्षों में पूरा हो जाता है। परिणामस्वरूप, आप लंबे समय तक कवरेज का फायदा उठा सकते हैं। अगर आपको लगता है कि पूरी पॉलिसी के दौरान आप प्रीमियम भुगतान नहीं कर पाएंगे, तो आपके लिए यह प्लान अच्छा है। प्रीमियम का भुगतान कुछ ही समय ही पूरा हो जाता है और बुढ़ापे में आप प्रीमियम भरने की बाध्यता से मुक्त हो जाते हैं। 

(लेखिका पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में लाइफ इंश्‍योरेंस की चीफ बिजनेस ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

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