Delhi Metro ने ट्रांसपोर्टर की सुविधा के लिए आधुनिकतम ‘लॉन्चर’ की शुरूआत की

नई दिल्ली : दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने आज अपनी निर्माण तकनीकि में एक नए आयाम की शुरूआत की है, जिसमें जनकपुरी पश्चिम -आर के आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर दोहरे यू-गर्डर रखे जाने के लिए ट्रासंपोर्टर से जुड़े विशेष तौर पर डिजाइन किए गए ‘लॉन्चर’ की शुरुआत की है।  डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. […]

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July 6, 2021

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नई दिल्ली : दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने आज अपनी निर्माण तकनीकि में एक नए आयाम की शुरूआत की है, जिसमें जनकपुरी पश्चिम -आर के आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर दोहरे यू-गर्डर रखे जाने के लिए ट्रासंपोर्टर से जुड़े विशेष तौर पर डिजाइन किए गए ‘लॉन्चर’ की शुरुआत की है। 

डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में मजलिस पार्क के निकट इस लॉन्चर ने अपना कार्य आरंभ किया।पिछले चरणों में निर्माण कार्यों के दौरान यू-गर्डरों को 350/400 टन क्षमता वाली दो क्रेनों की मदद से स्थापित किया जाता था। जिन्हें प्रत्येक खंबे के पास खड़ा किया जाता था और इन यू-गर्डरों को प्रत्येक खंबे तक बारह एक्सल वाले लगभग 42 मीटर लंबे ट्रेलर की मदद से लाया जाता था। ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र में, इन भारी-भरकम क्षमता वाली क्रेनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान तलाशना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि ये क्रेनें बहुत जगह घेरती हैं।  इसके अतिरिक्त, 28 मीटर लंबाई वाले यू-गर्डरों को इतने लंबे ट्रेलरों पर लेकर जाना भी एक कठिन कार्य था, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सड़कों पर या तो अत्यधिक भीड़भाड़ होती है अथवा रात्रि के समय भी भारी यातायात होता है। इन मजबूरियों के चलते अक्सर निर्माण कार्यों में यू-गर्डरों के इस्तेमाल में दिक्कतें आती हैं। 

ट्रांसपोर्टर एक तय स्थल से यू-गर्डरों को उठाते हैं और पहले से निर्मित यू-गर्डरों पर बिछाई गई अस्थायी पटरियों पर आगे बढ़ते हैं और फीडिंग प्वाइंट से लॉन्चर तक अपेक्षित संख्या में यू-गर्डर ले जाते हैं। फलस्वरूप, यू-गर्डरों को ट्रेलर के माध्यम से पूरे निर्माण स्थल पर न रखकर एक निर्धारित उपयुक्त फीडिंग प्वाइंट तक ले जाया जाता है, इससे बहुत कम स्थान की जरूरत पड़ती है। यह नया लॉन्चर 62 मीटर लंबा, 10.4 मीटर चौड़ा तथा कुल 230 टन भार के साथ 12.2 मीटर ऊंचा है। यह 4 फीसदी तक ग्रेडिएंट और 200 मीटर व्यास वाले कर्व के लिए व्यवस्था कर सकता है और 14.5 मीटर से 250 मीटर तक के स्पैन की लॉन्चिंग के लिए सक्षम है।

फीडिंग प्वाइंट से लॉन्चर तक यू-गर्डरों की ढुलाई करने वाला ट्रांसपोर्टर 41.75 मीटर लंबा, 6.5 मीटर चौड़ा 4.8 मीटर ऊंचा है, इसका कुल भार 35 टन है तथा निर्धारित क्षमता 180 टन है। ट्रांसपोर्टर बिना लोड के 3 कि.मी. प्र.घं. की गति से तथा फुल लोड के साथ 2 कि.मी. प्र.घं. की गति से चल सकता है। यू-गर्डरों की लॉन्चिंग के पारंपरिक तरीके की तुलना में इस नए इनोवेशन का आउटपुट बहुत अधिक है। भारत में पहली बार ऐसी किसी तकनीकि का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्मित होने वाले यू-गर्डरों का कुल लोड अधिकतम 160 टन है और संविदा के अनुसार ऐसे 462 यू-गर्डरों का निर्माण होना है। मुकरबा चौक से अशोक विहार के बीच 9.5 कि.मी. लंबे वायाडक्ट के निर्माण कार्यों के लिए आज इस लांचर की शुरूआत की गई, जिस पर भलस्वा, मजलिस पार्क, आजादपुर और अशोक विहार सहित चार स्टेशन होंगे तथा इसका कनेक्शन मजलिस पार्क डिपो से होगा।

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